By Prabhakar

 पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव जोरों पर है। सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपना पूरा दम लगा दिया है। चुनाव की तारीख भी तय हो चुकी है। निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल के 294 विधान सभा सीटों के लिए 8 चरणों में मतदान होगा। पहले चरण का मतदान 27 मार्च को और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। 2 मई को मतगणना होगी। बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर तो लगा ही रही है साथ ही साथ भारतीय जनता पार्टी ने भी इस बार बंगाल में पूरी ताकत झोंक देना चाहती है। अब यह देखना बाकी है कि “वियेतनाम-वियतनाम” से शुरू हुए नारे में “जय श्रीराम-जय श्रीराम” जुड़ता है या ममता का रिमिक्स नारा “तोमार नाम अमार नाम, नंदी ग्राम-नंदी ग्राम” ही बना रहेगा।


Bengal Election Representational Image
Photo Credit: Youth Ki Aawaz


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 इस बार काफी दिलचस्प होने जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण हिंदुत्ववादी राजनीति करने वाली राजनीतिक पार्टी, भारतीय जनता पार्टी का मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में चुनावी मैदान में होना है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के सामने चुनौतियाँ भी कई हैं जो बार-बार चुनावी मैदान में “अवरोध” की तरह काम कर रही हैं और इससे मोदी सरकार को बड़ा झटका भी लग सकता है। इन अवरोधों में सबसे बड़ा अवरोध लम्बे समय से देश में चल रहा सरकार विरोधी किसान आंदोलन। यह किसान हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये कथिक काले कानूनों के विरोध में है। जहाँ एक ओर बीजेपी बंगाल चुनाव जीतने के लिए हर पैतरे आजमा रही है वहीं किसान दिल्ली से बंगाल तक बीजेपी के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान धीरे -धीरे पूरे देश में सभाएं करके बीजेपी को मजदूर-किसान विरोधी बता रहे हैं और बंगाल चुनाव में बीजेपी को वोट न करने की बात भी कह रहे हैं। 

बंगाल विधानसभा चुनाव की कई तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक तरफ ममता बनर्जी “दीदी” बनकर लोगों के मन में समाई नज़र आ रहीं तो दूसरी तरफ मोदी- मोदी की माला जपने वाले भी नज़र आये।

फोरम4 न्यूज के लिए कोलकाता से ग्राउंड रिपोर्ट कर रहे प्रभात और स्वतंत्र पत्रकार अजीत अंजुम की ग्राउंड रिपोर्ट देखिए-


 

 

साल 2011 से पहले वामपंथ का गढ़ माना जाने वाला पश्चिम बंगाल दिनोंदिन अपनी राजनैतिक भूमिका में काफी पीछे छूटता जा रहा है। नंदीग्राम से लगे हल्दिया सीट से सीपीआईएम की विधायक रह चुकीं तापसी मंडल बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहती हैं कि “सापीआईएम की मूल राजनीति थी जनता के पास जाकर उनके हितों के लिए काम करना मगर अभी बस ऊपर-ऊपर आंदोलन हो रहा है।... हमारे जैसे लोग जो निचले स्तर पर काम करते हैं उनकी बातों का कोई महत्व ही नहीं है।“ हालाँकि अब तापसी मंडल अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी से जुड़ गई हैं।

समय की माँग और सत्ता में काबिज होने के लिए अब वामपंथी पार्टियों ने जमीनी हकीकत को समझते हुए कुछ युवा चेहरों को भी राजनीति की मुख्य धारा में आने का मौका देना शुरू कर दिया है। अब उन्हें युवाओं की अहमियत कुछ ज्यादा ही जान पड़ी। यही कारण है कि एसएफआई नेता और जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइसी घोष का पश्चिम वर्धमान जिले की जमुरिया सीट से चुनावी मैदान में उतारना सीपीएम के एक प्रयोग की तरह देखा जा रहा है। इसी तरह सीपीआईएम ने बंगाल चुनाव में जेएनयू की दीप्शिता धर, पृथा ताह और नंदीग्राम सीट पर  मीनाक्षी मुखर्जी जैसे युवा चेहरों को टिकट दिया है। 

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस 92 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पश्चिम बंगाल प्रदेश अघ्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के मुताबिक वाम दलो के साथ चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) से भी गठबंधन कर रही है। इस पर कांग्रेस से नाराज नेता ने आनंद शर्मा ने ट्वीट  कर कहा था कि आईएसएफ और ऐसे अन्य दलों से साथ कांग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है, जो कांग्रेस पार्टी की आत्मा है।

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ रही हैं। किसानो का देशव्यापी आंदोलन भी जोरों पर है। इसी बीच किसान और किसान नेताओं का दिल्ली ,हरियाणा, पंजाब से आकर नंदीग्राम में सभायें करना बताता है कि एक तरफ वे मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ वे ममता बनर्जी को पूरा फायदा भी पहँचा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता से तमाम ग्राउंड रिपोर्ट कर चुका फोरम4 न्यूज के कई रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करते हैं कि बंगाल अभी भी ममता बनर्जी के हाथ में है। रिपोर्ट के मुताबिक लोग ममता दीदी को फिर से सत्ता में लाना चाहते हैं और कथित तौर पर साम्प्रदायिक राजनीति करने वाली भाजपा को नापसंद करते हैं। बंगाल के लोगों के मुताबिक ममता सरकार ने सुशासन, सामाजिक और आर्थिक रूप से हर मौके पर उनकी मदद की है।