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संकल्प ही है विकल्प

By Prabhakar

दिल्ली मेंसबसे पहली रामलीला बहादुरशाह ज़फर के समय पुरानी दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई थी। यहाँ की रामलीला में पात्रों की वेशभूषा दर्शनीय है।



Courtesy: Adarsh Upadhyay is licensed under CC BY-NC-SA 2.0 

बीते सालों की तरह इस बार भी देश भर में दशहरा काफी धूमधाम से मनाया गया । दशहरे का मेला हो या दशानन का वध, देखने वालों की कतार लगी रहती है । बच्चे-बूढ़े हर कोई अपने-अपने अंदाज में इस ख़ास मौके का लुत्फ़ उठाता है। कुछ लोग इसे अपनी धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं और कुछ लोग इसे केवल हर्षोल्लास का पर्व मानते हैं। दशहरा अपने साथ अनेक खुशियां लेकर आता है। लोकनायक राम की लीला भारत के अनेक क्षेत्रों में होती है। मर्यादा, नैतिकता, विनम्रता ,करूणा ,क्षमा, धैर्य, त्याग तथा पराक्रम के सर्वोत्तम उदाहरण राम हिंदू सनातन धर्म के सबसे पूज्यनीय और महानतम देव माने जाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने उनके जीवन पर केन्द्रित भक्तिभावपूर्ण सुप्रसिद्ध महाकाव्य रामचरितमानस की रचना की है। इन दोनों के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं में भी रामायण की रचनाएं हुई हैं जो काफी प्रसिद्ध भी हैं। खास तौर पर उत्तर भारत में राम अत्यंत पूज्यनीय हैं और आदर्श पुरुष हैं। इन्हें पुरुषोत्तम शब्द से भी अलंकृत किया जाता है।

              भारत के बाहर के भूखंडों जैसे बाली, जावा, श्री लंका आदि में भी रामलीला  प्राचीन काल से यह किसी न किसी रूप में प्रचलित रही है। जिस तरह श्रीकृष्ण की रासलीला का प्रधान केंद्र उनकी लीलाभूमि वृंदावन है उसी तरह रामलीला का स्थल है काशी और अयोध्या। इसी तरह दिल्ली में भी रामलीला का इतिहास बहुत पुराना है। दिल्ली में, सबसे पहली रामलीला बहादुरशाह ज़फर के समय पुरानी दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई थी। यहाँ की रामलीला में पात्रों की वेशभूषा दर्शनीय है। नई दिल्ली के द्वारका में विजयादशमी पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा हम सभी को देश की भलाई के लिए कम से कम एक ऐसा संकल्प लेना चाहिए जिससे देश में किसी न किसी के भलाई का कार्य हो।

          रावण के सभी अवगुण धर्म के मार्ग में बाधक की तरह काम करते हैं और राम धर्म के पर्याय हो गये हैं। धर्म, व्यक्ति और सामाज निर्माण का कार्य करता है। शायद इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हम अपने भीतर की कमियों, आसुरी शक्तियों को नष्ट करने में करें। यह संकल्प किसी भी रूप में हो सकता है। यदि मैं पानी बचाता हूं तो यह भी संकल्प हो सकता है। मैं खाना खाता हूं और जूठा नहीं छोड़ूंगा, यह भी संकल्प हो सकता है। मैं बिजली बचाऊं यह भी संकल्प हो सकता है। कभी भी देश की संपत्ति का नुकसान नहीं करूंगा, यह भी संकल्प हो सकता है।

          एक ऐसी जगह, एक ऐसा ख़्याल, एक ऐसी सोच जो हर लिहाज से परफैक्ट है। जहाँ परफैक्ट गवर्नेंन्स है, जहाँ सब लोगों का ख़्याल रखा जाता है। जहाँ सब लोग खुश होते हैं। जहाँ सब को अपने सपने पूरा करने का मौका मिलता है। जहाँ भेद-भाव नहीं होता। जहाँ पढ़ने का, आगे बढ़ने का सबको अधिकार होता है। ऐसे ही राज्य के सपने को रामराज्य ख़ुद में समेटे हुए है इसीलिए राम के शासन प्रणाली को जानना ज़रूरी हो जाता है। रामलीला में रामराज्य का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, बिना राम के शासन प्रणाली का ज़िक्र किये बात अधूरी ही रहेगी। देश बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार मना रहा है। ऐसे में आजादी के सत्तर साल बाद भी हम ख़ुद को कहाँ पाते हैं, हमारा समाज किस स्थिति में है इसका आकलन करना जरूरी हो जाता है। क्या हम रामराज्य की ओर बढ़ रहे हैं या अभी कलयुग के किसी राम के इन्तजार में वहीं खड़े हैं अगर ऐसा है तो अभी से संकल्पित होकर कार्य करने की जरूरत है तभी हम अपने देश पर गर्व कर सकेंगे। और तभी रामलीला के सारगर्भित अर्थ तक पहुंच सकते हैं।