By Gautam Kumar

आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। कइयों को हिरासत में लिया जा चुका है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा जिनपर दंगे भड़काने का आरोप है, अभी तक उनपर कोई कार्यवाही नही हुई है


A burnt house at Karawal Nagar, Delhi

24 फरवरी से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में शुरू हुई हिंसा को एक दंगे के रूप मे देखा जाए या पोग्रोम के रूप मे, इसपर बहस चल रही है। इसी बहस के बीच मरने वालों की संख्या 53 पहुँच गई। कितने घायल हुए इसकी गिनती नही हो सकती। मगर कितने घर जले है इसकी गिनती हो सकती है। शिव विहार, करावल नगर, भजनपुरा या जाफ़राबाद की तरफ अगर आप निकले तो उन जले हुए घरों की ओर देखें कि क्या उनमें अभी भी जान है? वो जला हुआ घर आपको बताएगा कि कैसे भीड़ ने उस घर कि धड़कनों को निकाला, काटा और फेंक दिया। वो घर आपको और भी बहुत कुछ बता सकता है, वो आपके हर सवाल का जवाब देगा। किसने मारा है? कौन मरा है? सब।

ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब सरकारें भी दे सके इसीलिए उन्होंने भी अपना काम शुरू कर दिया है। गिरफ्तारी अपने चरम पर है। आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। कइयों को हिरासत में लिया जा चुका है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा जिनपर दंगे भड़काने का आरोप है, अभी तक उनपर कोई कार्यवाही नही हुई है। दी हिन्दू न्यूज़पेपर के मुताबित इस तथाकथित सांप्रदायिक दंगे में अब तक 700 से अधिक केस दर्ज़ किये जा चुके हैं और लगभग 2400 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

कितने हिन्दू मरें और कितने मुसलमान, इसकी आधिकारिक जानकारी कहीं उपलब्ध नही है। जिन्हे हिरासत में लिया गया, जिनपर केस दर्ज़ हुआ, जिनकी गिरफ्तारी हुई, जिनपर मुक़दमा चलेगा, जिन्हे सज़ा मिलेगी या जिनपर CrPC की धरा 321 का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ़ केस वापस ले लिया जाएगा, इसकी भी जानकारी नहीं है। अगर कभी मिल पाए ये जानकारी तो संख्या देखकर यह पता लगाना मुश्किल नही होगा कि ये हिंसा बस दो पक्षों का झगड़ा था जो कि दंगे में तब्दील हो गया या किसी अंकल सैम कि सोची समझी साज़िश जिसे अकादमिक बहस में पोग्रोम भी कह रहे हैं।

जानिये क्या हैं CrPC की धारा 321
पोग्रोम और दंगे के बीच का अंतर